PM Vishwakarma Yojana 2026: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक सहायता, आधुनिक औजार, कौशल प्रशिक्षण और व्यवसाय बढ़ाने के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस योजना के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले कारीगरों को ₹15,000 तक का टूलकिट प्रोत्साहन, प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड और दो चरणों में ₹3 लाख तक का बिना गारंटी वाला ऋण मिल सकता है।
इस योजना का लाभ बढ़ई, दर्जी, लोहार, सुनार, कुम्हार, नाई, मोची, राजमिस्त्री और अन्य निर्धारित पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े पात्र लोगों को मिल सकता है। इसके साथ ही लाभार्थियों को विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र, पहचान पत्र, कौशल प्रशिक्षण और अपने उत्पादों की मार्केटिंग में सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
यदि आप पारंपरिक काम करते हैं और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी सहायता प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए उपयोगी हो सकती है। इस लेख में Vishwakarma Yojana Status 2026, योजना के लाभ, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, 18 व्यवसायों की सूची, आवेदन प्रक्रिया और ऋण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
PM Vishwakarma Yojana 2026: Overview
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना |
| अंग्रेजी नाम | PM Vishwakarma Scheme |
| शुरुआत | 17 सितंबर 2023 |
| संबंधित मंत्रालय | सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) |
| मुख्य उद्देश्य | पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता देना |
| पात्र व्यवसाय | योजना में शामिल 18 पारंपरिक व्यवसाय |
| टूलकिट प्रोत्साहन | ₹15,000 तक |
| प्रशिक्षण स्टाइपेंड | ₹500 प्रतिदिन |
| पहला ऋण चरण | ₹1 लाख तक |
| दूसरा ऋण चरण | ₹2 लाख तक |
| कुल ऋण सहायता | ₹3 लाख तक |
| लाभार्थी ब्याज दर | निर्धारित शर्तों के अनुसार 5% सालाना |
| पंजीकरण का माध्यम | कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) |
| आधिकारिक वेबसाइट | https://pmvishwakarma.gov.in/ |
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना क्या है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना केंद्र सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे 17 सितंबर 2023 को शुरू किया गया था। इसका प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों में काम करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों की आर्थिक तथा तकनीकी स्थिति बेहतर बनाना है।
भारत में बड़ी संख्या में लोग पीढ़ियों से अपने पारंपरिक हुनर के आधार पर रोजगार करते आ रहे हैं। कोई लकड़ी से फर्नीचर बनाता है, कोई कपड़ों की सिलाई करता है, तो कोई मिट्टी के बर्तन, लोहे के औजार या जूते तैयार करता है। ऐसे कई कारीगर छोटे स्तर पर काम करते हैं और उन्हें आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता तथा बाजार तक पहुंच की जरूरत होती है।
विश्वकर्मा योजना के माध्यम से इन कारीगरों को उनके काम की पहचान देने और व्यवसाय में सुधार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। इसके अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन, ऋण और मार्केटिंग संबंधी सहायता से जोड़ा जा सकता है।
यह योजना हर बेरोजगार व्यक्ति के लिए सामान्य आर्थिक सहायता नहीं है। इसका लाभ लेने के लिए आवेदक का निर्धारित पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक में सक्रिय रूप से काम करना और योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत मिलने वाले प्रमुख लाभ
1. ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता
योजना के तहत पात्र कारीगरों को अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजार खरीदने के लिए ₹15,000 तक का टूलकिट प्रोत्साहन मिल सकता है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार यह सहायता ई-वाउचर के रूप में दी जाती है।
इसका उद्देश्य कारीगरों को बेहतर उपकरण उपलब्ध कराना है, जिससे काम की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार हो सके। उदाहरण के लिए, बढ़ई को लकड़ी का काम करने वाले उपकरणों और दर्जी को सिलाई से संबंधित औजारों की जरूरत हो सकती है।
हालांकि, यह सहायता सभी आवेदकों को बिना किसी शर्त के नहीं मिलती। इसके लिए पंजीकरण, पात्रता और योजना के निर्धारित चरणों को पूरा करना आवश्यक है।
2. प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में पात्र कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान निर्धारित नियमों के अनुसार ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड मिलने का प्रावधान है।
प्रशिक्षण के मुख्य स्तर इस प्रकार हैं:
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बेसिक ट्रेनिंग: सामान्यतः 5 से 7 दिनों की।
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एडवांस ट्रेनिंग: सामान्यतः 15 दिनों या उससे अधिक की, पात्रता और उपलब्धता के अनुसार।
प्रशिक्षण में आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल, काम की गुणवत्ता, सुरक्षित कार्य पद्धतियां और व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित करने जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। इससे कारीगर अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक जरूरतों के अनुसार विकसित कर सकते हैं।
3. ₹3 लाख तक का बिना गारंटी वाला ऋण
योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को व्यवसाय की जरूरतों के लिए दो चरणों में कुल ₹3 लाख तक का ऋण मिल सकता है। इस ऋण के लिए संपत्ति को गारंटी के रूप में रखने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन ऋण को तय नियमों के अनुसार वापस चुकाना जरूरी है।
| ऋण का चरण | अधिकतम राशि | पुनर्भुगतान अवधि |
|---|---|---|
| पहला चरण | ₹1,00,000 | 18 महीने |
| दूसरा चरण | ₹2,00,000 | 30 महीने |
| कुल | ₹3,00,000 तक | प्रत्येक चरण के अलग नियम |
पहले चरण का ऋण प्राप्त करने के लिए बेसिक ट्रेनिंग पूरी करना आवश्यक है। दूसरे चरण में ऋण प्राप्त करने के लिए पहले ऋण खाते का नियमित होना और योजना में तय अन्य शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इसमें डिजिटल लेनदेन अपनाने या एडवांस ट्रेनिंग पूरी करने जैसी शर्तें लागू हो सकती हैं।
ध्यान दें कि ₹3 लाख तक की राशि ऋण की अधिकतम सीमा है। प्रत्येक लाभार्थी को पूरी राशि मिलना निश्चित नहीं है। ऋण की स्वीकृति संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था तथा योजना के नियमों पर निर्भर करती है।
4. ऋण पर 5% सालाना ब्याज दर
योजना के अंतर्गत पात्र ऋण पर लाभार्थी के लिए निर्धारित ब्याज दर 5% सालाना है। सरकार योजना के नियमों के अनुसार ऋणदाता संस्था को ब्याज सहायता प्रदान करती है।
इससे कारीगरों को अपने व्यवसाय के लिए औपचारिक ऋण प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। ऋण लेने से पहले उसकी शर्तों, पुनर्भुगतान अवधि और अपनी आर्थिक क्षमता को समझना जरूरी है।
5. डिजिटल भुगतान पर प्रोत्साहन
विश्वकर्मा योजना में निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले लाभार्थियों को पात्र डिजिटल लेनदेन पर ₹1 प्रति लेनदेन का प्रोत्साहन मिल सकता है। इसकी अधिकतम सीमा 100 पात्र लेनदेन प्रति माह है।
इस सुविधा का उद्देश्य छोटे कारीगरों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उनके व्यवसाय को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना है।
6. विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र और पहचान पत्र
पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थियों को विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र तथा पहचान पत्र दिया जाता है। इससे उनके पारंपरिक व्यवसाय की पहचान स्थापित करने और योजना के तहत उपलब्ध सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
7. उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग में सहायता
योजना के अंतर्गत पात्र कारीगरों को अपने उत्पादों और सेवाओं को बाजार तक पहुंचाने में सहायता देने का भी प्रावधान है। इसमें ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ाव, प्रदर्शनियों और व्यापार मेलों में भागीदारी जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
इस तरह कारीगर केवल स्थानीय ग्राहकों तक सीमित रहने के बजाय अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
विश्वकर्मा योजना में शामिल 18 व्यवसायों की सूची
योजना के अंतर्गत निर्धारित 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े पात्र कारीगर आवेदन कर सकते हैं।
| क्रमांक | व्यवसाय |
|---|---|
| 1 | बढ़ई |
| 2 | नाव बनाने वाला |
| 3 | शस्त्र निर्माता |
| 4 | लोहार |
| 5 | हथौड़ा और औजार बनाने वाला |
| 6 | ताला बनाने वाला |
| 7 | सुनार |
| 8 | कुम्हार |
| 9 | मूर्तिकार, पत्थर तराशने वाला या पत्थर तोड़ने वाला |
| 10 | मोची या जूते बनाने वाला |
| 11 | राजमिस्त्री |
| 12 | टोकरी, चटाई या झाड़ू बनाने वाला तथा कॉयर बुनकर |
| 13 | पारंपरिक गुड़िया और खिलौने बनाने वाला |
| 14 | नाई |
| 15 | माला बनाने वाला |
| 16 | धोबी |
| 17 | दर्जी |
| 18 | मछली पकड़ने का जाल बनाने वाला |
इन व्यवसायों में काम करने वाले सभी लोगों को स्वतः लाभ नहीं मिलता। आवेदक का संबंधित काम में सक्रिय होना और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना आवश्यक है।
विश्वकर्मा योजना के लिए पात्रता की शर्तें
आवेदन करने से पहले निम्नलिखित पात्रता शर्तों की जांच कर लें:
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आवेदक की उम्र पंजीकरण के समय कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
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आवेदक योजना में शामिल 18 व्यवसायों में से किसी एक से जुड़ा होना चाहिए।
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आवेदक हाथों और औजारों का उपयोग करके संबंधित पारंपरिक काम करता हो।
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आवेदक असंगठित क्षेत्र में स्वयं के रोजगार के आधार पर काम करता हो।
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सामान्य नियमों के अनुसार, एक परिवार से केवल एक सदस्य योजना के लाभ के लिए पात्र होता है।
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सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
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कुछ सरकारी ऋण-आधारित स्वरोजगार योजनाओं के तहत पिछले पांच वर्षों में ऋण लेने वाले आवेदकों पर प्रतिबंध लागू हो सकता है। इसके लिए वर्तमान नियमों और निर्धारित अपवादों की जांच करना जरूरी है।
परिवार की परिभाषा और पहले लिए गए ऋण से संबंधित शर्तें योजना के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होती हैं। इसलिए आवेदन से पहले अपनी पात्रता की पुष्टि कर लें।
विश्वकर्मा योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज
पंजीकरण के समय सामान्यतः निम्नलिखित दस्तावेज या जानकारियां मांगी जा सकती हैं:
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आधार कार्ड।
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आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर, जहां OTP सत्यापन जरूरी हो।
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बैंक खाते का विवरण।
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राशन कार्ड।
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पारंपरिक व्यवसाय से संबंधित जानकारी।
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आवेदन में मांगी गई अन्य आवश्यक जानकारी।
यदि आवेदक के पास राशन कार्ड नहीं है, तो योजना के निर्देशों के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। बैंक खाता उपलब्ध न होने पर पंजीकरण के दौरान खाता खुलवाने में सहायता की जरूरत हो सकती है।
दस्तावेजों की अंतिम सूची संबंधित प्रक्रिया और आधिकारिक निर्देशों पर निर्भर करती है।
Vishwakarma Yojana Online Apply 2026: आवेदन कैसे करें?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से सहायता ली जा सकती है। आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है।
स्टेप 1: नजदीकी CSC सेंटर पर जाएं
अपने क्षेत्र के अधिकृत कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
स्टेप 2: अपनी पात्रता की जांच कराएं
CSC संचालक को अपने पारंपरिक व्यवसाय और अन्य आवश्यक जानकारी दें। आवेदन से पहले यह सुनिश्चित करें कि आप योजना की पात्रता शर्तें पूरी करते हैं।
स्टेप 3: आधार सत्यापन पूरा करें
पंजीकरण के दौरान आधार आधारित पहचान सत्यापन किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार OTP या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा करें।
स्टेप 4: आवेदन फॉर्म भरें
अपना नाम, पता, बैंक विवरण और व्यवसाय से संबंधित जानकारी सही-सही दर्ज करवाएं। आवेदन जमा करने से पहले सभी विवरणों को ध्यान से जांच लें।
स्टेप 5: आवेदन जमा करके पावती सुरक्षित रखें
आवेदन पूरा होने के बाद उसे जमा करें। यदि पावती या संदर्भ संख्या मिलती है, तो उसे सुरक्षित रख लें। इससे आगे की जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी।
स्टेप 6: सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने दें
आवेदन का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय, जिला कार्यान्वयन समिति और स्क्रीनिंग समिति के स्तर पर किया जा सकता है।
स्टेप 7: पात्रता के अनुसार लाभ प्राप्त करें
पंजीकरण और सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र, प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन और अन्य उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ा जा सकता है। ऋण प्राप्त करने के लिए संबंधित चरण की शर्तें अलग से पूरी करनी होती हैं।
ध्यान दें: योजना के अंतर्गत पंजीकरण निःशुल्क है। किसी अनधिकृत व्यक्ति को पंजीकरण कराने के नाम पर पैसे न दें।
PM Vishwakarma Yojana 2026 कैसे चेक करें?
यदि आपने योजना के लिए आवेदन किया है और उसकी स्थिति जानना चाहते हैं, तो आधिकारिक पोर्टल या संबंधित CSC की सहायता ले सकते हैं।
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सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pmvishwakarma.gov.in/ खोलें।
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वेबसाइट पर उपलब्ध लॉगिन या आवेदन से संबंधित विकल्प देखें।
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आवेदन संख्या या अन्य जरूरी विवरण तैयार रखें।
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यदि ऑनलाइन स्टेटस की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उस CSC से संपर्क करें जहां आपने आवेदन किया था।
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जरूरत पड़ने पर संबंधित स्थानीय निकाय या जिला स्तर के कार्यालय से जानकारी प्राप्त करें।
पोर्टल के विकल्प समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए आवेदन की स्थिति जानने के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत केंद्र का उपयोग करें।
आवेदन करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
विश्वकर्मा योजना में आवेदन करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतना लाभदायक है।
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अपने वास्तविक व्यवसाय का ही विवरण दर्ज करें।
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आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी सही रखें।
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आवेदन जमा करने के बाद उपलब्ध पावती या संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
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किसी अनधिकृत एजेंट को पंजीकरण के नाम पर पैसे न दें।
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OTP, बैंक PIN और अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें।
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टूलकिट प्रोत्साहन और ऋण के बीच अंतर समझें।
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ऋण लेने से पहले पुनर्भुगतान की शर्तों को ध्यान से पढ़ें।
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किसी भी लाभ को निश्चित न मानें, क्योंकि स्वीकृति पात्रता और सत्यापन पर निर्भर करती है।
Vishwakarma Yojana 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. विश्वकर्मा योजना में कितनी सहायता मिलती है?
पात्र लाभार्थियों को ₹15,000 तक का टूलकिट प्रोत्साहन, प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड और दो चरणों में कुल ₹3 लाख तक का ऋण मिल सकता है। प्रत्येक लाभ के लिए निर्धारित शर्तें लागू होती हैं।
2. क्या योजना के तहत ₹3 लाख मुफ्त मिलते हैं?
नहीं। ₹3 लाख तक की राशि ऋण सहायता है, जिसे तय शर्तों के अनुसार वापस चुकाना होता है। इसे मुफ्त अनुदान नहीं समझना चाहिए।
3. टूलकिट सहायता किसे मिलती है?
योजना में पंजीकृत और निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पात्र कारीगरों को आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 तक का टूलकिट प्रोत्साहन मिल सकता है।
4. प्रशिक्षण के दौरान कितना स्टाइपेंड मिलता है?
योजना के नियमों के अनुसार पात्र प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण अवधि में ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिया जाता है।
5. विश्वकर्मा योजना में आवेदन कहां करें?
पंजीकरण के लिए अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर संपर्क करें। वहां आवेदन और आधार आधारित सत्यापन की प्रक्रिया में सहायता मिल सकती है।
6. क्या दर्जी, बढ़ई और लोहार इस योजना के लिए पात्र हैं?
हां, ये सभी योजना में शामिल पारंपरिक व्यवसायों में आते हैं। हालांकि, आवेदक को उम्र और अन्य पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
7. योजना की आधिकारिक वेबसाइट क्या है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmvishwakarma.gov.in/ है। योजना की पात्रता, पंजीकरण और उपलब्ध लाभों की जानकारी के लिए इस पोर्टल या अधिकृत CSC से संपर्क करें।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को अपने हुनर को विकसित करने तथा व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता देने वाली महत्वपूर्ण सरकारी पहल है। इसके अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र, कौशल प्रशिक्षण, ₹15,000 तक का टूलकिट प्रोत्साहन, प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड और दो चरणों में ₹3 लाख तक का ऋण मिल सकता है।
यदि आप योजना में शामिल 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक से जुड़े हैं, तो अपने नजदीकी CSC पर जाकर पात्रता और पंजीकरण की जानकारी प्राप्त करें। आवेदन से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देशों को पढ़ें और समझें कि टूलकिट प्रोत्साहन, स्टाइपेंड तथा ऋण की शर्तें अलग-अलग हैं। सही जानकारी के साथ आवेदन करने और सत्यापन पूरा करने से योजना के अंतर्गत उपलब्ध पात्र लाभ प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।












