क्या आप जानते हो बुधवार को सुप्रीम कोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमे शिक्षा के अधिकार और शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने की सोच रहा है परीक्षा से जुडा ये मामला एक बार फिर से महत्वपूर्ण बन गया है ये मामला 14 साल तक के उमर वाले बच्चो को पढाने वाले शिक्षको की पात्रता असे जुडा आहे याची कामे मांग की गई है कि बच्चो को बेहतरीन न और एक आसान शिक्षा देने के लिए टी ए टी की अनिवार्यता स्कूल मे लागू होनी चाहिये
अल्पसंख्यक स्कूलों का मामला क्या है?
इस अर्जी में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को भी शिक्षा अधिकार जैसे की (RTE) कानून की दायरे में रहने की मांग की है जिसने भी याचिका दी है उनकी दलील है की यदि कुछ संस्थानों को RTE के प्रावधानों से अलग रखा जाता है इससे सभी बच्चों को एक जैसी अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाएगी
मांग में संविधान के कुछ नियमों का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि हर बच्चे को बराबर और अच्छी पढ़ाई का मौका मिलना चाहिए। किसी बच्चे के साथ पढ़ाई के मामले में भेदभाव नहीं होना चाहिए
TET जरूरी क्यों है
Teacher Eligibility Test यानी TET एक ऐसी परीक्षा है, जिससे पता चलता है कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए जरूरी योग्यता रखते हैं या नहीं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कुछ जरूरी मानक तय किए गए हैं TET का मकसद यह देखना है कि शिक्षक इन मानकों को पूरा करते हैं या नहीं
साल 2026 में RTE से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन शिक्षकों के लिए TET जरूरी है, उनके लिए यह परीक्षा पास करना महत्वपूर्ण है। हालांकि पुराने शिक्षकों को होने वाली परेशानी को देखते हुए कोर्ट ने TET पास करने के लिए समय बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 तक कर दिया था
RTE कानून में क्या नियम हैं
शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी RTE कानून साल 2009 में बनाया गया था। इस कानून के तहत बच्चों को मुफ्त और जरूरी शिक्षा देने की व्यवस्था है। इसी कानून में यह भी बताया गया है कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के पास कम से कम कितनी योग्यता होनी चाहिए और स्कूल में पढ़ाई का स्तर कैसा होना चाहिए
अल्पसंख्यक स्कूलों में भी RTE के नियम लागू होने चाहिए या नहीं, इस बात पर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में मामला आया है। इसमें मुख्य बात यह है कि एक तरफ बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिलता है तो दूसरी तरफ अल्पसंख्यक संस्थानों को भी संविधान में कुछ खास अधिकार दिए गए हैं इसलिए दोनों अधिकारों के बीच सही संतुलन रखना जरूरी है
महुआ मोइत्रा का मामला भी चर्चा में
इसी समय तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़ा एक अलग मामला भी सुप्रीम कोर्ट में आया ऐसे मामले में विदेशी निवेश से जुड़ी कुछ कंपनियों में असली पैसा लगाने वाले और उसका फायदा लेने वाले लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है
अदालत में यह बात भी सामने आई कि अगर यह जानकारी मांगी जा रही है, तो इसे सार्वजनिक करने के पीछे असली वजह क्या है
इस मामले में आगे की सुनवाई और अलग-अलग अर्जियां भी दर्ज की गई हैं
इस फैसले से पढ़ाई पर क्या असर पड़ सकता है
TET और RTE से जुड़े इस मामले की सुनवाई का असर शिक्षकों, स्कूल वालों और बच्चों पर भी पड़ सकता है। खासकर उन स्कूलों के लिए यह मामला ज्यादा जरूरी है जो RTE के नियम और अल्पसंख्यक स्कूलों को मिले अधिकारों को लेकर कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।लेकिन एक बात ध्यान में रखना जरूरी है कि याचिका में जो मांग की गई है, वह अभी सिर्फ मांग है। सुप्रीम कोर्ट का आखिरी फैसला अलग होता है। इसलिए जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक किसी नए बदलाव को पक्का नियम मानना सही नहीं होगा












