Land Registry New Rules 2026अगर आप जमीन खरीदने, बेचने या अपनी जमीन की रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने Digital India Land Records Modernization Programme (DILRMP) 3.0 के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। यह कार्यक्रम 2026 से 2031 तक चलेगा और इसका उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड, नक्शे और रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी को ज्यादा डिजिटल और एकीकृत बनाना है। इसके लिए 565.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जमीन के हर टुकड़े को मिलेगा 14 अंकों का Bhu-Aadhaar
नई व्यवस्था में हर जमीन के टुकड़े को 14 अंकों वाला Bhu-Aadhaar यानी ULPIN देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ जमीन के नक्शों को जियो-रेफरेंस किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसी जमीन की सही पहचान और उसके रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम से जोड़ना है।
इससे जमीन की पहचान से जुड़ी जानकारी अलग-अलग रिकॉर्ड में खोजने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, इसे लागू करने की प्रक्रिया राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से होगी।
रजिस्ट्री कार्यालयों में भी होगा बदलाव
DILRMP 3.0 के तहत Sub-Registrar Offices को आधुनिक Registration Seva Kendras के रूप में विकसित करने की योजना है। सरकार के अनुसार इन केंद्रों में जमीन और संपत्ति से जुड़े रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जाएगा।
इसका मकसद रजिस्ट्री से जुड़ी सेवाओं को नागरिकों के लिए ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाना है।
जमीन के रिकॉर्ड, नक्शे और रजिस्ट्री डेटा को जोड़ा जाएगा
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अलग-अलग भूमि संबंधी रिकॉर्ड को आपस में जोड़ना है। सरकार Land Stack के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड, संपत्ति के नक्शे और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को एकीकृत करने की दिशा में काम कर रही है।
इससे जमीन की जानकारी तक पहुंच आसान बनाने और विभागों के बीच डेटा साझा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन भी होगा आसान
देश के कई हिस्सों में रजिस्ट्री के बाद जमीन के रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदलने यानी म्यूटेशन की प्रक्रिया अलग से करनी पड़ती है। सरकार पहले से ही ऐसे सिस्टम को बढ़ावा दे रही है जिसमें रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड के बीच बेहतर डिजिटल कनेक्शन हो।
सरकारी जानकारी के अनुसार, 88.6% Sub-Registrar Offices पहले ही राजस्व कार्यालयों से जुड़े हुए हैं, जिससे कई जगहों पर रजिस्ट्री के बाद भूमि रिकॉर्ड में ऑटोमेटिक म्यूटेशन की व्यवस्था संभव हुई है।
जमीन खरीदने वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
नई डिजिटल व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि देश के हर राज्य में जमीन की रजिस्ट्री के सभी नियम एक जैसे हो गए हैं। स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, जरूरी दस्तावेज और स्थानीय प्रक्रिया राज्य के अनुसार अलग हो सकती है।
इसलिए जमीन खरीदने या बेचने से पहले संबंधित राज्य के Registration Department और Revenue Department की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें। जमीन की रजिस्ट्री से पहले मालिकाना हक, जमीन का रिकॉर्ड, नक्शा, किसी तरह का विवाद या लोन जैसी जानकारी की भी जांच करना जरूरी है।
नोट: DILRMP 3.0 केंद्र सरकार की 2026–2031 की भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण योजना है। इसके तहत कई बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। इसलिए इसे पूरे देश में एक ही दिन से लागू हुआ नया रजिस्ट्री कानून समझना सही नहीं होगा।








